जान लें डीपफेक के बारे में नहीं तो होगी 3 साल की जेल और 5 लाख का जुर्माना, सरकार ने गिनाएं कानून

एक्ट्रेस रश्मिका मंधाना के डीपफेक वीडियो ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की मदद से बनाए गए फर्जी वीडियो पर बहस का मुद्दा उठा दिया है।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या डीपफेक के खिलाफ नियम बनाने की जरूरत है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के नियमों का पालन किया जाए तो डीपफेक के जरिए फर्जी फोटो और वीडियो बनाने वालों को सजा हो सकती है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं…

नियम

  • आईटी एक्ट 2000 की धारा 66E के तहत बिना इजाजत किसी की फोटो और वीडियो बनाने पर 3 साल की सजा और 2 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। इस नियम के तहत गोपनीयता के उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का नियम है। इसमें किसी की निजी फोटो लेने और उसे बिना अनुमति के शेयर करने के आरोप के तहत कार्रवाई हो सकती है।
  • आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत सॉफ्टवेयर या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किसी की अश्लील तस्वीरें बनाने और साझा करने पर 3 साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है। अगर आप बार-बार ऐसा करते हैं तो आपको 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है।
  • डीपफेक के मामले में आईपीसी की धारा 66C, 66E और 67 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें आईपीसी की धारा 153A और 295A के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार ने गिनाएं कानून

केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर को भी डीपफेक के खिलाफ शिकायत के नियम याद दिलाए गए हैं। इसमें आईटी रूल्स 2023 का जिक्र किया गया है। साथ ही आईपीसी का भी जिक्र किया गया है। लेकिन सवाल यह उठता है कि डीपफेक की पहचान कैसे करें?

डीपफेक की पहचान

  • वीडियो और तस्वीरों में चेहरे के किनारों, हेयरलाइन, भौंहों और चश्मे के बॉर्डर को देखकर डीपफेक की पहचान की जा सकती है।
  • डीपफेक वीडियो की पहचान वीडियो चलाते समय आंख और सिर की गतिविधियों से की जा सकती है।
  • AI जनरेट किए गए वीडियो और फ़ोटो में हाथ और पैर की लंबाई समान नहीं होती है। इस तरह ऐसे वीडियो की पहचान की जा सकेगी।

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